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Showing posts from May, 2017

जानिये वर्ष २०१६-१७ में विभिन्न बागवानी फसलों का कितना क्षेत्र एवं कितना उत्पादन होगा

वर्ष 2016-17 के दौरान देश में बागवानी फसलों का उत्पादन 295 मिलियन टन से अधिक होने का अनुमान वर्ष 2016-17 के दौरान बागवानी फसलों का उत्पादन पिछले वर्ष 2015-16 के अनुमानों की तुलना में 3.2 % अधिक है कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के द्वारा वर्ष 2016-17 के लिए विभिन्न बागवानी फसलों के क्षेत्र एवं उत्पादन का दूसरा अग्रिम अनुमान जारी किया जा रहा है। ये अनुमान देश में विभिन्न राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। निम्नलिखित तालिका में वर्ष 2016-17 के लिए बागवानी फसलों के क्षेत्र एवं उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान को वर्ष 2016-17 (प्रथम अग्रिम अनुमान) तथा वर्ष 2015-16 (अंतिम. अनु.) के सापेछ प्रस्तुत किया गया है: ('000 हेक्टेयर में क्षेत्र, ‘000 मी. टन में उत्पादन) कुल बागवानी 2016-17 ( दू . अ . अनु .) 2016-17 ( प्र . अ . अनु .) 2015-16 %  चेंज  2016-17 ( दू . अ . अनु .)  निम्न के सापेछ : 2016-17 2015-16 ( अंतिम अनु ) ( प्र . अ . अनु .) ( अंति...

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का अहम फैसला

अनुसूचित जनजाति के कार्मिक को बडी सजा से पहले समिति करे जांच राष् ‍ ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से कहा है कि अनुसूचित जाति के कर्मचारी को किसी भी तरह की बडी सजा / दण् ‍ ड से पहले मामले की जांच के लिए एक ऐसी समिति बनाए जाए जिसमें अनुसूचित जनजाति के कम से कम दो सदस् ‍ य अवश् ‍ य हों। राष् ‍ ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध् ‍ यक्ष श्री नंद कुमार साय की अध् ‍ यक्षता में आज नई दिल् ‍ ली में आयोग की बैठक में यह फैसला किया गया। आयोग के संयुक् ‍ त सचिव शिशिर कुमार ने बताया कि अनुसूचित जनजाति के कार्मिक न् ‍ याय से वंचित न हों इस ‍ के लिए आयोग ने यह निर्णय किया है। आयोग की संस् ‍ तुति के अनुसार मंत्रालयों एवं विभागों में यदि जांच के लिए अनुसूचित जनजाति के अधिकारी मौजूद नहीं हैं तो उस समिति में अन् ‍ य विभागों के अनुसूचित जनजाति के अधिकारियों को शामिल किया जाये। आयोग ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण व...

जानिए बर्लिन में प्रधानमंत्री प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा

उनका जर्मनी का पूरा वक्तव्य योर एक्सेलेंसी , चांसलर अंगेला मर्कल , फ्रेंड्स , गुटेन टाग डोएषलैंड ! मेरी यह जर्मनी की दूसरी ऑफिसियल यात्रा है। 2015 में जब हन्नोवर फेयर में भारत पार्टनर कंट्री था , तब भी मेरा आना हुआ था।इसी प्रकार आइ . जी . सी . का भी यह मेरा दूसरा अनुभव है। 2015 में हमें भारत में चांसलर मर्कल को होस्ट करने का सौभाग्य मिला था।किन्तु हमारी भेंट तथा वार्ताओ का सिलसिला केवल आइ . जी . सी . की मीटिंग्स तक सीमित नहीं है । चांसलर मर्कल और मैने कई बार मल्टीलेटरल सममिट्स के अवसर पर भी बातचीत की है। एक्सेलेंसी मर्कल , बात चाहे बायलैटरल संबंधों की हो ; या मानवता वादी समस्याओ की ; क्षेत्रीय विषयों का मुद्दा हो , अथवा वैश्विक परिपेक्ष के प्रशन हो - आप के साथ हर वार्ता हर प्रकार से मेरे लिए अत्यंत ज्ञानकारी और लाभकारी रही है। आप से मुझे हर बार कुछ न कुछ नया सीखने को मिला है ।एक्सेलेंसी , मैं अपने और हमारे डेलीगेशन के हार्दिक स्वागत और सम्...